Ratnakar Mishra

दिसम्बर 31, 2011

एक आखरि मौका ….Please दे दो न भगवान्

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 10:04 पूर्वाह्न
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आज मैं आप सबो को अपनी जात की  कहानी सुनाता हूँ  , जात से आप  कुछ गलत मतलब नहीं निकाल लीजिये गा , मैं कोई जाती वाद या , सम्प्रदाएक बात नहीं करने वाला हूं वैसे भी ये बाते मैं या तो अपने देश के नेता या फिल्म वालो पर छोड़ देता हूँ , वो ज्यादातर इस तरह की बाते करते है .

मैं तो आपको इस दुनिया के सबसे अजीब से समाज के सबसे  अजीब  सी   जात से आप का परिचय करा रहा हूं अरे डरने की कोई बात ही नहीं है, हम भी आप लोगो की तरह इसी धरती पर रहेते है , मगर लाइफ एलियन वाली जीते है .

‘हमें अपने  workplace  से इतना प्यार है की , हमारी जाति के 22Percent  लोग अपने co-workers से ही शादी कर लेते है ‘

‘हम कही भी जिमेदारी लेना नहीं चाहते चाहे वो घर हो या बाहर ‘

‘हमारी जिन्दगी पूरी की पूरी confusion  मैं ही गुजरती है , कार से ले कर मकान तक … ‘ये blue  वाला कार ठीक  रहेगा या Green  वाला ‘ …’अपने घर मैं  रहना  है या फिर कही विदेश मैं settling down  होना है , पूरी लाइफ confusion  से भरी रहती है ‘

‘हमें कुछ भी saving  करना नहीं आता चाहे वो beer  हो या water … फिर पैसे बचाने की बात ही नहीं आती है … चाहे कितना भी मिले … 25th  के बाद हमेसा 1 का इंतजार रहता है ‘

‘हम कभी भी संतुष्ट नहीं होते … ‘साला ये भी कोई salary hike  है …इस से तो अच्छा नहीं ही देते …. ,…..क्या इस बार variable pay सिर्फ  90 Percent ही मिलेगा …धत तेरे की …इतने मैं क्या होगा ‘

‘इतने सारे चीजो के बाद भी हम काम  9-10 घंटे डेली काम करते है ‘

‘हमें अपने घर वालो के साथ रहना पसंद नहीं है ….हम शेर के बच्चे तो है ….बस जैसे ही अपने पैरो पर खड़े हुए की नहीं …. अपना शिकार करने खुद ही निकल जाते है वो बात अलग है की शिकार करते नहीं खुद हो जाते है  ..’

‘हम पूरी universe  मैं कभी भी खुस नहीं रहने वाले जीवो मैं से एक है … हमेसा कोई न कोई प्रॉब्लम रहती ही है …..बीवी से ले कर वीसा तक और , Girlfriend  से  ले कर Promotion  तक , Onsite Trips से ले कर commitments तक .’

‘बस हम सभी मतलब की हमारी बिरादरी के 100 Percent  लोग दिन रात भगवान् से यही प्राथना करते है की ,भगवान् लाइफ मैं एक और मौका दो .. …इस बार ये SOFTWARE ENGINEER  वाली लाइफ नहीं चुनुगा ‘

दिसम्बर 28, 2011

कुछ नया करे

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 8:25 अपराह्न
नया साल आने वाला है , और अब सभी लोग लेखा-जोखा ले कर बैठ गए है की , पुराने साल मैं ये सब हुआ और नए साल मैं ये सब होगा ,लिस्ट रेडी है नए साल का की क्या -क्या करना है, मगर ये तो हरेक साल होता है लोग अच्छे कामो का लिस्ट बनाते है और उसे कुछ दिनों के बाद कूड़े मैं फेक देते है ,भाई मैं तो कहता  हूँ चलो इस साल अपने पुराने फेके गए कूड़े को चुनो  और नए साल मैं  कुछ नया करे.

नवम्बर 6, 2011

खूबसूरती एक नज़र मैं

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 6:17 अपराह्न

दुनिया की सब से खुबसूरत चीज़ क्या है ,आप को इस का कोई अनुमान है  शायद हां  या सायद ना .आप किसी लड़की /लड़के को देख कर बोलते है , देखो वो कितना/कितनी  सुन्दर है ,उस समय आप  के पास क्या कुछ ऐसा चीज़ होता है जिस से आप उस की खूबसूरती माप सके ,मेरे ख्याल से नहीं .जब आप किसी अच्छी चीज़ जैसे की कोई घर,कार  मोबईल फ़ोन ,कंप्यूटर ,टीवी को तो आप अपने दोस्तों से बोलते है कितनी खुबसूरत है काश मेरे पास भी एक होती ,मगर जरा रुकिय कुछ दिनों के बाद आप फिर किसी ऐसी चीज़ को देख कर बोलते है वाह ये तो मेरे वाले से भी ज्यादा खुबसूरत है , तो क्या हम खूबसूरती का गलत अनुमान लगाते है ,शायद हां .हम अब यही पर गलत हो जाते है क्योंकि हम खूबसूरती का चयन अपनी इन आखों से करते है जो की हमें उस वस्तु की बाहरी सुन्दरता दिखता है ,यदि हमें उस के अंदर की सुन्दरता देखना है तो हमें उसे अपने दिल से देखना पड़ेगा ,जब आप अपने दिल से किसी चीज़ को पसंद कीजिए गा तो  वो हमेसा आप को सुंदर लगेगा चाहे वो कितना भी पुराना ही न क्यों न हो जाये ,तो दुनिया को देखने का तरीका शायद हमें बदलना पड़ेगा.


अक्टूबर 29, 2011

अंजान

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 4:41 अपराह्न

रात के २ बज रहे होगे सायद उस ने अनुमान लगया ,घर मैं सभी सो गए होगे या जाग रहे होगे ? वो ये सोच रहा था , अरे ये शहर तो काफी बदल गया है, यहाँ पहले एक मैदान हुआ करता था मगर उसकी जगह अब एक बड़े मुल्तिप्लेक्स  ने ले ली थी , यही पर बचपन मैं वो अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेला करता था ,  सारे शहर मैं तो जैसे सडको का जाल  बुन दिया गया है  , सारी सड़के उस को अंजान लग रही थी. रात की रोशनी मैं उसे अपना शहर ही अनजान लग रहा था , जहा उसने अपने जीवन के २० साल बिताये थे , अरे भैया ये कहा से ले जा रहे हो सही रास्ता तो ये है ना उस ने ऑटो वाले से पुछा , अरे आप नए आये हो क्या यहाँ , हम यदि वो रास्ता लेगे तो २ किलोमीटर आगे से घूम के आना पड़ेगा  ऑटो वाले ने  कहा  , अब अपना शहर ही अंजान लगने लगा उस ने सोचा , उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था की जब उस ने ये शहर छोड़ा था और जब वो ८ साल बाद वापस आ रहा है तो ये इतना  कैसे बदल गया की , उस के अपने शहर ने उस को पहचाने  से इंकार  कर दिया .

अगस्त 18, 2011

सच्चाई का साथ दे ..

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 6:05 पूर्वाह्न
दूर कही पर कोई बैठ कर ये सारे तमाशे देख रहा था कि कोई किसी को कैसे लूट कर अपने खजाने भर रहा है ,
कोई भूखा -प्यासा है तो कोई मज़े उड़ा रहा है , कोई मज़े से अपने आलीशान घर  मैं  सो रहा है तो कोई  रोड
पर अपनी जिन्दगी बिता रहा है , बस अब उस से बर्दास्त नहीं हुआ , अपने हाथ मैं अहिंसा कि तलवार ले कर
मैदान में कूद पड़ा , सामने वालो कि बोलती बंद हो गयी ,पूरी जनता उस के साथ है, अब उस को कोई नहीं रोक
सकता है वो हमारे हक़ कि लडाई लड़ रहा है .चलो हम सभी उस का साथ दे …..चलो सचाई का साथ दे ..चलो अन्ना का साथ दे ..
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