हम अपने आप को किसी से कम कभी नहीं समझते ऑफिस मैं अपने बॉस से अपने आप को बेहतर मानते है .
“अरे एक भी काम ठीक से करना इनको नहीं आता …इस month का तो allowance ही नहीं दिया ..वगैरा-वगैरा”
“है लास्ट बाल मैं चार रन बनाने थे वो भी नहीं बना पाए इस से अच्छा तो शुक्ला जी का लड़का खेलता है .”
“ये हिंदी फिल्म वाले ना कैसी -कैसी मूवी बनाते है साउथ इंडियन की नक़ल करके ..वो तो जैसे ऐसे बोल रहे हो
की जिन्दगी मैं उन्होने नक़ल ही ना की हो ….
“कल रात मैं कहा थे तुम लोग .. दारू पि के शोर करोगे तो पिटाई थो
होगी ही ..मगर वो साला भूल गया ही ..रात मैं दारू पिने के बाद उसी के कारण हम लोग पिटे थे अरे क्या करे
हम ऐसे ही है ..किसी दूसरी की boyfriend /girlfriend देख कर सोचते है की काश मेरे वाला भी ऐसा ही होता.
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02/23/2012
क्या करे हम ऐसे ही है
Filed under: कहानी,Social issue — ratnakarmishra @ 1:13 अपराह्न
Tags: boyfriend, girlfriend, office, ratnakar mishra, work by ratnakar, work by ratnakar mishra
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3s टिप्पणियाँ »
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sahi hai bhidu….
Comment by Shashwat Shriparv — 02/23/2012 @ 6:03 अपराह्न |
kya bat h sir….u must write more n more…..
Comment by Haridwar jha — 04/26/2012 @ 12:49 अपराह्न |
धन्यबाद भाई ….:)
Comment by ratnakarmishra — 04/27/2012 @ 3:40 पूर्वाह्न |