Ratnakar Mishra

11/28/2009

क्या पाया तुमने …

Filed under: कविता — ratnakarmishra @ 6:24 अपराह्न
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तुमने अब तक इस  दुनिया से क्या पाया …!
अपनी दिनचर्या  मैं बंध कर तुमने क्या पाया.. !
दुसरे की बुराई करके तुमने क्या पाया …!
अपना सारा जीवन किसी पर न्योछावर करके तुमने क्या पाया …!
जिन्दगी को सही और बुरे ढंग से जी कर तुमने क्या पाया …!
तुमने अब तक इस दुनिया से क्या पाया …!

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