Ratnakar Mishra

10/30/2009

मित्र

Filed under: कविता — ratnakarmishra @ 11:19 पूर्वाह्न
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जैसे- जैसे हम हमारे जीवन का रास्ता  तय करते है
मिलेंगे लोग हर रोज़  हमे नये..
अधिकांश केवल संयोग से मिले हैं.
लेकिन, कुछ को हमारे रास्ते में भेजा जाता है.

इन दोस्तों  में क्या खास है
कौन सा  बंधन हैं हम नहीं बता सकते हैं;

उनके प्यार की कोई सीमा नहीं होती है.
उनकी उपस्थिति हम मैं जोश  बढ़ाता है
उनका साथ  दिल में गर्मी महसूस कराता है.

यह प्यार जब एक दालान पर हो जाता है,
तब भी मील की दूरी पर हो जाती है.
और हां, इन दोस्तों को, भगवान हमारे रास्ते में भेजता है,
रहने के लिए हमारे पास हमेशा ..

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