Ratnakar Mishra

03/31/2012

Kerala की कहानी Part-2

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 5:52 pm
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केरला अपनी सुंदरता के लिए क्यों प्रसिद्ध है ,ये उस समय पता चला ,मेरे सामने कुछ केरेलियन लड़िकया खड़ी थी ,और मैं मन ही मन सोच रहा था कि इन मैं से कौन मेरे साथ  एडमीशन लेगी ,

मैं कभी पिली ड्रेस वाली के बारे मैं सोच रहा था तो कभी नीली के बारे मैं , इतने मैं मेरी सोच को झटका लगा और वहाँ खड़े कुछ मलयालम लड़के ,नीली और पिली ड्रेस वाली से Alien Language मैं बात करने लग गए, उस समय मैं ने अपने आप को कोषा कि यदि मुझे ये language आती तो शायद मैं भी कुछ code-decode कर लेता खैर मैंने इस बात को जाने दिया फ़िलहाल क्योंकि मेरा admission का नंबर आ गया था .

“आप को Trivandrum Campus  दिया जा रहा है 2-June आप को वहा पर reporting करनी है”

मैं रास्ते भर Trivandrum Campus के बारे मैं सोचने लग गया , ऐसा होगा वैसा होगा ये करुगा वो करुगा वगैरह- वगैरह , मन मैं ढेर सारे अरमान ले कर “अलुवा” से “त्रिवेंद्रम” तक कि यात्रा मैं मैं ने हजारो ख्वाबो के लिस्ट बना और मिटा डाले , रास्ते मैं सफर करते वक्त २ और मेरे जैसे लोग मिल गए जो अपने ख्वाबो को हकीकत मैं बदलने Trivandrum Campus जा रहे थे , बस फिर क्या था एक से भले तीन वो दोनों भी बिहार के ही रहने वाले थे और उनसे ही पता चला कि और हमरे जैसे दस है , मैंने जिज्ञासाबस बस उनसे पूछ दिया लड़किया कितनी है ,दोनों ने बड़े संसय नज़र से मुझे देखा और कहा ‘नहीं मालूम ‘.

“उस के बाद से दोनों मैं से किसी ने मुझ से बात नहीं कि मुझे इस का कारण आज तक पता नहीं चला .”

हम लोग रात मैं @11 बजे त्रिवेंद्रम पहुचे ,मेरी भूख के मारी जान निकल रही थी ,रास्ते मैं न जाने क्या-क्या मिल रहा था “कप्पा चिप्स “ , सापड “ और न जाने क्या-क्या मैं डर गया कि  “अंकल चिप्स “ के बदले ये कौन से चिप्स मिल रहा है .

Trivandrum पहुच कर खाना खाने का अरमान मिटटी मैं मिल गया , कही कोई दुकान खुली ही नज़र नहीं आ रही थी पूरा का पूरा शहर मस्ती मैं सो रहा था .

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