Ratnakar Mishra

04/14/2012

ये क्या हुआ ? केरला कि कहानी part-5

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 6:20 am

मैं बड़े बुझे हुए मन से अंदर गया ,अंदर करीब 60-70 chair लगे हुए थे , सबो ने अंदर घुसते ही अपनी –अपनी सीट हथिया ली ,जैसे कि कोई खाने कि चीज़ रखी हो और यदि जल्दी न कि तो खत्म हो जायेगा.

‘और मेरी नज़र  उस भीड़ मैं कोई जाना –पहचान चेहरा खोजने लगी  ,कि इतने मैं किसी ने आवाज़ दी ,’

‘अरे मिश्रा , यहाँ आ जाओ !’

मैं ने नज़र घुमा के देखा तो मेरे साथ वाले दोनों बंदे मुझे बुला रहे थे ,

‘मैं जैसे ही उनके पास जाने वाला था कि ,एक मलयालम Aliean ने लपक के उस खाली सीट को Fill कर दिया .

“अरे ओह्ह भाई …ये क्या कर रहे हो …कहते हुए मैं ने उसे खा जाने वाली नजरो से  देखा “

उस Aliean ने बड़ा सा प्यारा जबाब दिया “Sorry !  I don’t know your language”

“ये ले, एक और मुसीबत, अब तो केरला मैं लड़ाई भी English मैं करनी पड़ेगी ,वैसे लड़ाई मातृभाषा मैं करने का अलग ही  मज़ा है ”

लेकिन पहला दिन था ,सो मैं ने बहस करना ठीक नहीं समझा ,और चुप-चाप जा के last chair पर बैठ गया .

कुछ देर के बाद एक लंबा-चौड़ा शरीर का मालिक ,बड़ा सा तोंद निकला हुआ ,माथे पर कुछ चन्दन जैसा लगा था उसके ,उसकी पेंट बार –बार उसके कमर को छोड़ रही ही हो ऐसा लग रहा था ,पैरों मैं चप्पल डाले ,और उस के साथ मैं करीब 7 लोगो कि फौज ने उस  Amphitheatre मैं प्रवेश किया.

थोड़ी देर के बाद एक छोटी कद कि महिला आई ,उसका Amphitheatre मैं  प्रवेश करना उसी तरह का था जैसे कि ancient रोमन टाइम मैं   Eileithyia   का  Arena मैं आना , उस ने अपना परिचय दिया कि, वो हमारे कॉलेज  कि प्रिंसिपल है ,और एक –एक कर के उस ने अपने साथ आये सभी लोगो का परिचय दिया .

मैं ने पाया कि सबो के नाम बड़े अजीब –अजीब से थे जैसे कि “परमेस्वरण नाम्पुह्त्री (Parameswaran Nampoothiri ) , और एक अजीब सी बात हुई मेरे साथ , जब तक मैं त्रिवेंद्रम मैं रहा  इस नाम को कभी भी सही नहीं बोल पाया न जाने क्यों , ऐसा नहीं कि मैं ने बोलने कि कोशिस नहीं कि ?

उसके बाद हमारे Intro कि बात आई , सभी ने खड़े हो कर अपना –अपना नाम बताना शुरू कर दिया , कुछ देर तक तो मैं उनको follow करता रहा लेकिन बाद मैं मुझे लगा कि ,ये नाम याद करना और बोलना मेरे बस का नहीं है , फिलहाल अभी तो .

“तभी किसी ने काफी ब्रेक का announcment किया  ,मैंने तहे दिल से उस बंदे को धन्यबाद दिया ,क्योंकि मुझे इसकी बहुत जरुरत थी ,थकान के कारण मुझे जोरो कि नीद आ रही थी .

ब्रेक के दौरान सभी लोग Amphitheatre से बाहर आ गए और एक दूसरे से घुलने-मिलने लग गए.

मैं ने भी एक-दो से बात कि लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ “क्योंकि मुझे छोड़ कर सभी के सभी न जाने क्यों बहुत  खुश नज़र आ रहे थे “

जब ब्रेक खत्म हुआ सभी अपनी –अपनी सीट पर जा कर बैठ गए , उसके बाद प्रिंसिपल ने फिर से भाषण देना शुरू कर दिया , उस बीच न जाने क्या हुआ मुझे मैं पीछे कि chair पर बैठा -बैठा  झपकी लेने लग गया .

मेरी नीद अचानक  जोर-जोर से ताली बजने कि आवाज़ से खुली , तो मैं ने देखा कि एक बंदा  प्रिंसिपल के साथ  खड़ा है .

“अरे ..ये –ये तो वही लड़का है जिसके बाल बड़े –बड़े थे ,और संजू बाबा वाला getup था जिसको  counseling  मैं देखा था  , क्या हुआ इसके बालो को अभी तो @20min. पहले बड़े-बड़े , थे और इस तरह अचानक “

“प्रिंसिपल ने मेरी सोच को बीच मैं ही काटते हुए , announce किया कि ये इस batch का नया co-ordinator ,सौरव  है “

“तो ये बालों कि बलि इस co-ordinator पोस्ट के लिए था “.

तभी लड़कियों कि तरफ से भी एक लड़की हमारे सामने आ कर खड़ी हो गयी मैं समझ गया कि वो जरुर girls co-ordinator है , मगर ताली इतनी जोर से बजने लगी थी कि,मैं उसका नाम नहीं सुन पाया .

मैं ने सोचा ये program कब तक चलेगा कल रात से ही कुछ नहीं खाया है भूख के मारे मेरी जान निकल रही थी .

मगर प्रिंसिपल थी, कि बोले जा रही थी लगातार बिना ब्रेक के .उसने ढेर सारे नियम कानून बताए .. और भी बहुत कुछ सभी बड़े ध्यान से सुन  रहे थे ,और मुझे तो प्रिंसिपल के गुण lady Narayan Shankar कि तरह लगे , अरे  वही अपने मोहब्बत वाले अमित जी , .और बाद मैं मेरी ये सोच सही ही हुई.

मगर मेरे पल्ले कुछ नहीं पड़ रहा था मुझे लगा कि यदि अब कुछ देर और हुआ तो मैं यही Amphitheatre मैं शहीद हो जाउगा भूख के मारे .

फिर करीब @12:45 हमे lunch break दिया गया , मैं लोगो को follow करते हुए आगे बढ़ने लगा , तभी मैं ने देखा कि एक लंबी सी लाइन लगी जो करीब 100 लोगो कि होगी ,मेरे साथ आये लड़के उस का हिस्सा बन गए ,मैं भी उन के साथ हो लिया , मगर मुझे अभी तक ये समझ मैं नहीं आ रहा था कि ये uncle टाइप के लोग यहाँ क्या कर रहे है . एक तो जोरो कि भूख और उपर से killer line कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था .

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1 Comment »

  1. Mast keep it coming…

    Comment by Shashwat Shriparv — 04/15/2012 @ 6:24 pm | Reply


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