Ratnakar Mishra

04/26/2012

ये क्या हुआ ?केरला कि कहानी Part-7

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 12:26 pm

हमेशा जूता पैरों के साइज़ का अच्छा लगता है ,यदि आप कोई छोटा या बड़ा पहन लोगो तो या तो वो बार-बार काटेगा या नहीं तो निकल जायेगा ,बस कुछ इसी तरह कि बात होती है ,साथ मैं रहने वालो के साथ ,

जिंदगी मैं बहुत सारे समझौते करने पडते है बस इसी सिद्धांत को ले कर मैं ने भी त्रिवेंद्रम मैं समझौता कर लिया लेकिन बाद मैं वो मुझे बहुत ही महगा पड़ा.

हमारे कॉलेज मैं होस्टल नहीं था ,सो हमने कॉलेज के आसपास रहने कि जगह कोई मक़ान खोजने लग गए ,हमारी खोज को पूर्ण बिराम तब लगा जब एक मलयाली लड़के ने हमारी मदद कि ,और पुरे @90min के बाद हमें मकान मिल गया ,मैं और मेरे साथ आये चार और लडको ने वो मकान share पर लिया , रूम रेंट सब तय करने के बाद उस मलयाली ने हमसे चार हज़ार रुपये मांगे ,हमने पूछा किस बात का तो उस ने बड़ा सीधा सा जवाब दिया रूम दिलवाया है उसी का commision. मरता क्या न करता हम ने उसे रुपये दे दिए.

बस उस रूम मैं घुसते ही बाकि के चारो ने उसी तरह से रूम पर कब्ज़ा जमना शुरू कर दिया जैसे कि पुराने ज़माने मैं राजा राम ने अश्वमेघ यज्ञ किया था और उनका घोडा जहाँ-जहाँ से गुजरता वो राज्य उनका हो जाता . रूम पर कब्ज़ा करते –करते शाम हो गयी .मुझे बहुत जोरो कि भूख लगी थी , सो मैं ने अपनी ये इच्छा अपने रूम वालो को बताई तो उसमें से एक बंदा राजीव मेरे साथ चलने के लिए तैयार हो गया .

किसी तरह घूमते हुए हम एक गोलंबर के पास पहुचे ,कुछ और रास्ता तय करने के बाद हमें एक रेस्टोरेंट टाइप का कुछ दिखा ,”लक्ष्मी रेस्टोरेंट “ हम दोनों लपक कर वहां पहुचे और एक खाली टेबल पर बैठ गए . भर पेट खाने के बाद हम दोनों वापस लौट रहे थे.  कि पीछे से किसी ने आवाज़ दी .

“राजीव –राजीब “

हमने पलट कर देखा तो एक दुबला-पतला सा लड़का और उसके साथ और तीन लड़के थे ,हमें रोक रहे थे .

“उस दुबले-पतले से लड़के ने कहा राजीव तुम्हे याद है न सर लोगो ने हमें @9 बजे बुलाया है ..आ जाना ..वैसे तुम लोगो ने रूम तो देखा ही होगा …..

मैं ने देखा है राजीव ने तपाक से जवाब दिया …. उसके बाद वो सारे “लक्ष्मी रेस्टोरेंट” मैं चले गए.

सर कौन सर और किस के यहाँ जाना है ?मैं ने अपना सर खुजाते हुए ये सवाल राजीव से पूछा .

अरे कुछ नहीं हमें आज रात अपने College Senior से मिलने जाना है ,और कोई बात नहीं .

मैं लगभग भूल चुका था कि मैं तो पहले से कि आमंत्रित हूँ आज रात को …मगर उनलोगों ने आ कर मेरे चहरे कि हँसी और खुसी वैसे छीन ली जैसे कि लास्ट विकेट कि साझेदारी 100 रन होने के बाद अपने capiton cool धोनी कि होती है.

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1 Comment »

  1. Keep it coming

    Comment by Shashwat Shriparv — 04/26/2012 @ 12:54 pm | Reply


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