Ratnakar Mishra

06/02/2012

कुछ तो फायदा है …!!!

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 5:00 am

बहुत दिनों कि चुप्पी साधने के बाद आखिर दुबे जी ने अपना मुँह खोला ,सब लोग बड़े बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे , लेकिन मामला ही कुछ ऐसा था कि दुबे जी बोल ही नहीं पा रहे थे , “यदि आप के पास हाथी हो , और उसका  चारा महगा हो गया हो तो आप कर भी क्या सकते है ,सिवा इसके कि हाथी को जंगल में छोड़ आये” .चलिए में ज्यादा देर तक आप को असमंजश में नहीं रखुगा ,बात ऐसी है कि दुबे जी ने नयी -नयी गाड़ी ली थी कार लोन मेले में लोन ले कर .और उनके गाड़ी लेने के ठीक एक दिन बाद सरकार ने पेट्रोल कि कीमत में आग लगा दी ,अब उस दिन से दुबे जी सदमे मैं चले गए किसी से कोई बात नहीं कर रहे थे .यहाँ तक कि देश व्यापी आंदोलन भी हुआ मगर दुबे जी टस से मस नहीं हुए ,उन्हें लगा कि सरकार बस उनके खिलाफ ही साजिस रच रही है और सारी पार्टी सरकार का साथ दे रही है ,और तेल कंपनी उनकी जानी  दुश्मन बन गयी है . उनकी मुसीबत और भी बढ़ गयी थी नए कार कि खुशी में उन्होंने अपने प्यारे और वफादार स्कुटर को बेच दिया था रंगीला गराज वाले को .और जब वो रंगीला से अपना स्कूटर वापस लेने पहुचे तो रंगीला ने बीस हज़ार रूपये कि मांग कर दी ,जब कि उन्होंने अपना स्कूटर मात्र साथ हज़ार में बेचा था , रंगीला बड़ा चालाक निकला और मौके कि नजाकत को देखते हुए उसने अपना पासा फेका ,बस फिर क्या था दुबे जी रंगीला को सरकारी एजेंट समझ बैठे ,

मगर जब आज सुबह -सुबह मुस्कुराते हुए हमारे पास आये तो , बड़ा आश्चर्य हुआ .

मैंने पूछा सब ठीक ,तो दुबे जी ने कहा ठीक नहीं बहुत ही बढिया मिश्र जी ,सरकार ने तो पेट्रोल कि कीमत ज्यादा कर के मुझे  तो जैसे बरदान दिया है ,

“वो कैसे मेरे मुह से निकल पड़ा ”

देखिये में दिन बा दिन मोटा होते जा रहा था मगर अभी में ने अपना वजन कम कर लिया है

वो कैसे ?

रोज दिन पुरे चार किलोमीटर चलता हूँ बस पकड़ने और सब्जी लेने  के लिए

मेरा बैंक बैलेंस बढ़ रहा है ,क्योंकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तमाल करता हूँ .

पर्यवारण को भी में राहत दे रहा हूँ .अपनी गाड़ी नहीं चला कर .

अब ट्रेफिक कि धुल -गर्मी और बरसात नहीं खाता क्योंकि ,पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तमाल करता हूँ ,

उन्होंने उसके बाद बहुत सारी बाते कही जो कि पर्यवारण,सेहत और पैसे से सम्बंधित थी ,कुछ तो मेरे पल्ले पड़ी ही नहीं .

वैसे अभी कहाँ ?में ने पूछा .

साइकिल लेने जा रहे है नाके कि दुकान तक चलिए हमारे साथ .

गाड़ी तो निकाल लूं फिर चलता हूँ ,और में गाड़ी निकाल कार वापस आया तो दुबे जी गायब थे ….

 

 

 

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2 Comments »

  1. बहोत खूब भाईजान …..पेट्रोल की कीमतों ने जो आग लगाई है आम लोगों की जिंदगी में….उसका अपने दूसरा पहलु दिखाया है…!!

    Comment by avinash kumar — 06/02/2012 @ 6:50 am | Reply

  2. marmik hai bandhu…. bahut accha… likhate rahiye..

    Comment by Shashwat Shriparv — 06/03/2012 @ 9:13 am | Reply


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