Ratnakar Mishra

08/30/2012

ये क्या हुआ ? केरला कि कहानी Part-10

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 3:13 pm

इंसानी दिल भी  कमाल कि है ,ये कभी भी किसी कि गिरफ्त में आ जाता है ,और फिर न जाने क्या -क्या होता है ,इस बात कि चर्चा यदि में यहाँ पर करू तो पूरा का पूरा पेज उसी से भर जायेगा और पढ़ने के बाद आप लोग  बोलोगे  कि क्या बकवास लिखा  है ,ऐसा कही होता है क्या ? मगर दिल का हाल तो वही जानता है जिस पर गुजरती है ,वैसे भी किसी बहुत बड़े शायर ने कहा है कि  “प्यार  में नीद उडती नहीं ग़ालिब और गहरी होती है ,क्योंकि उनके  सपने जो देखने होते है ” .

केरला  ने बहुत लोगो को इस तरह के सपने दिखाए मगर हकीकत और सपने में बहुत फ़र्क होता है ,वैसे ये बात ओणम कि है केरला के एक सबसे बड़े त्योहार कि दस दिनों कि छुट्टी का मज़ा लेने में अपने घर वापस आ गया ,और जब वापस लौटा तो कहानी बहुत ही आगे बढ़ चुकी थी या ये कहे कि बहुत सारी कहानी ने तो पैदा होते ही अपना दम तोड़ दिया था  ,जितने लोग उतनी बातें सुनने को मिल रही थी ,मगर यदि सारी बातो को मिलाया जाये तो कुछ भी निष्कर्ष नहीं निकल पा रहा था ,मुझे तो कभी -कभी ऐसा लग रहा था कि कोई सस्पेंस वाली  फिल्म कि पार्ट -1 कि  CD ही ले उड़ा, में ने अपने तर्के से कुछ छानबीन कि और उसके बाद जो मुझे जानकारी मिली उसका परिणाम सच में बहुत ही भायनक था और उस समय में पछता रहा था कि में घर क्यों गया में इस का हिस्सा क्यों नहीं बना .

वैसे बात यहाँ पर टूटे हुए दिल कि थी और अपने आदत के अनुसार में उसमें भी कुछ खोज रहा था उसी दौरान मेरे एक तथाकथित दोस्त ने जो बताया वो बड़ा ही दिलचस्प था .

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4 Comments »

  1. kya kamaal likhte hain aap

    Comment by pankaj kumar sharma — 08/30/2012 @ 8:40 pm | Reply

  2. Supr sir…. Rely kya likha hai aapne sir, padhte padhte kerla me bitaye hue sare din 1-1 kar yad aa rhe the…… aage ka part v update kijiye sir… Main Besabri se intjar kar rha hun…..

    Comment by Prem Prasoon — 09/07/2012 @ 5:15 am | Reply


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