Ratnakar Mishra

12/25/2012

दिल तो बच्चा है जी ….

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 3:33 am

इंसानी फितरत को समझना या समझाना दोनों ही मुश्किल ही नहीं नामुमकिन काम है … कभी भी कुछ भी कर देता है … अभी पल मैं यहा तो  पल मैं कही और … लेकिन फितरत की सबसे  अजीब बात एक है की …. ये कभी भी अकेले नहीं आता हमेसा पैकेज मैं आता है … कन्फ्युज हो गए क्या … चलिये मैं आप को जरा एक्जाम्पल दे के समझता हूँ … खूबसूरत चीज़ किसे पसंद नहीं है … चाहे वो कुछ भी क्यों न हो … देखने के बाद सबों को उसे पाने की चाहत होने लगती है … मगर कुछ लोग ये सोच के पीछे हट जाते है की … ये सिर्फ देखने की चीज़ है देखो और अपने काम पे चलो … कुछ लोग थोड़ा बहुत कोशिस करते है … मगर अंगूर खट्टे है कह कर अपना पाला छाड़ लेते है … मगर कुछ लोग उसे अपनी जागीर समझ लेते है … बस फिर क्या यही से शुरू होती है जंग ….. वैसे आदि काल से ही मनुष्य दिखावा करते आ रहा है …. मगर कभी –कभी ठो हद हो जाती है … वैसे मैं या आप भी इस से अछूते नहीं है …. मगर क्या करे इंसानी फितरत के मारे है ….. वैसे इंसानी फितरत पर मुझे एक गाना याद आ जाता है “दिल तो बच्चा है जी “….

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2 Comments »

  1. Nice on bro..

    Comment by Shashwat Shriparv — 12/25/2012 @ 2:45 pm | Reply

  2. thank you shashwat bhai

    Comment by ratnakarmishra — 01/13/2013 @ 3:22 am | Reply


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