Ratnakar Mishra

03/15/2013

बस कुछ कह न पाया

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 7:29 pm

छुप-छुप के उसे घंटो देखता था ,कभी library मैं तो कभी class मैं ,कितनी मर्तबा उसका पीछा भी किया,की वो कहाँ-कहाँ जाती है ?करती क्या है ..? कई बार तो जताने की कोशिस भी की ,मगर न जाने क्यों सफल नहीं हो पाया ,एक बार तो  दोस्तों के कहने पर हिम्मत कर के उसके पास अपने दिल का  इज़हार बया  करने चला गया , मगर उसकी आँखों ने ऐसा जादू किया की ,आवाज़ हलक से बाहर ही नहीं निकली , उस दिन मैंने उसे नजदीक दे देखा और उसकी खुशबू महसूस की वो कितनी खूबसूरत है ,उसकी आँखे उस से भी ज्यादा खूबसूरत है, और बालो के क्या जब वो उनके साथ शरारत करते तो बड़े प्यार से वो उन्हें अपने कानो के पीछे ले जा कर समेट देती है ,,जैसे –जैसे उसके बारे मैं जानता गया उसके लिए दिल मैं प्यार और इज्ज़त दोनों बढते गए ,जब भी उसे किसी और लड़के से बात करते देखता तो एक अजीब सा दर्द मेरे सीने मैं उठता ,कई बार तो दोस्तों से उसे ले कर झगडा भी हो गया ,दोस्त मजाक उडाते “अरे जब इतना ही प्यार करते हो तो बोल क्यों नहीं देते “ ,लेकिन मैं उसे आज तक कुछ नहीं बोल पाया , बस हमेसा उसे दूर से ही देखता रहा और उसकी मुस्कराहट पर मुस्कुराता रहा , मगर ज़िंदगी भी अजीब है न ,जिसे इतना दिल से लगाया आज आज वो जा रही है ,अब फिर कभी जिंदगी मैं मुलाकात हो या न हो ,अब कभी उस से मिल भी पाऊँ या नहीं अब बस उसकी इस बिदाई मुस्कुराट को अपने सिने मैं कैद कर लेता हूँ ,जब भी उसकी याद आएगी इसे अपने सिने से निकाल कर थोड़ा -थोड़ा खर्च करूंगा , इतना चाहने के बाद भी मैं उसे कुछ कह क्यों न पाया ?

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