Ratnakar Mishra

11/11/2015

इसी दुनिया मैं कही …

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 6:08 am

6:30 सुबह अलार्म  ने बज कर अपनी ड्यूटी पूरी कर दी अब आप पे है आप उठो न उठो उसकी बला से ,और वैसे भी कौन कमबख्त छुट्टी के दिन उठना चाहता है .

6:40 अबे ये फिर से कैसे बज उठा .

7:00 अरे ये धमाका कैसा ,कही सच मैं बिहार जीत की खुशी मैं पाकिस्तान वालो ने हमला तो नहीं कर दिया .

7:01 अब हमला हो ही गया है तो बाहर जा के क्या मरना यही सोते -सोते मरता हूँ

7:02 ओए तेरी की दीपावली है आज इसलिए तो .

7:10 ठीक है घर से बाहर क्या दीपावली और क्या होली चलो सोते है .

7:15 ये व्ह्ट्स  एप किसने बनाया है मिले थो सही ,कोई सोने भी नहीं दे रहा ऐसा करो मिठाई और पटाके भी इसी से भेज दो

8:00 कही ऐसा तो नहीं सारी दुनिया ख़तम हो गयी है और मैं अकेला बचा हूँ इस धरती पे नहीं -नहीं जक्लीन और कटरीना दोनों मैं से किसी एक को बचा लो भगवान इतना कह जोर-जोर से घंटी बजने लगी मंदिर की .

8:03 दस मिनट से मैं दरवाज़े पे खड़ा हो के घंटी बजा रहा हूँ ,सो रहे थे क्या ? माकन मालिक सामने खड़ा था और अपने चश्मे के पीछे दो पड़े दो सियार सी भूखी आँखों से घूर रहा था .आज दीपाली है और महीने का एडवांस किराया कहा है .

8:07 सच कहा है किसी ने जब भी कोई अच्छा काम करने  जाओ तो पूरी कायनात आप को सोने नहीं देगी  अभी मैं कुछ देर मैं दुनिया को बचाने वाला ही  था .

8:20 हाथ मैं काफी का मग लिए pause mode  मैं जाने के बाद ध्यान आया आज तो घर की सफाई कर के ही रहूँगा .

8:22 बहुत हो गयी सफाई थक गया मैं थोडा आराम  करता हूँ फिर काम करूँगा

11:30 काफी ज्यादा पीने का उल्टा असर हो गया है ,इसे पीने के बाद सबसे ज्यादा नींद आती है ,कुछ तो किया  जाय दीपावली है आज ,थोड़ी देर और सोता हूँ ,फिर उसके बाद सोचता हूँ .

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