Ratnakar Mishra

05/08/2016

केरला की कहानी V2.3

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 1:55 pm

हम इंडियन इतनी जल्दी सुधर जाये तों क्या होगा जरा सोचो ,बार –बार गुप्ता जी के दरवाजे पे कचरा नहीं फेकेंगे ,ऑटो वाले से पांच रूपये के लिए नहीं लड़ेगे ,मिश्रा जी पान यहाँ –वहां नहीं थूकेंगे , दिवेदी घुस लेना छोड़ देगा ,केजरीवाल पलती मारना एक  मं एक मिनट हमारी कहानी मैं केजरीवाल आ ही नहीं सकता जी ,हमारी कहानी न उससे भी पुरानी है जितनी पुरानी अब इनकी दोस्ती हो गई है .

आज फिर कॉलेज मिस हो गया यार

हाँ ,सही बोल रहे हो चादर के निचे से ही सौरव ने कहा .

पक्का कल मिस नहीं करेंगे

हाँ बे ,वैसे ये पक्का इस हफ्ते का तीसरा है ,आज चौथा दिन है कल फ्राइडे फिर छुट्टी

तू सोचता बहुत है ,अभी सो जा

अच्छा ऐसा कर एक –एक सुट्टा लगाते है तब सोते है

हाँ ये आईडिया सही है बे

वैसे लोगो का कहना है की सिगरेट पीने से नींद भागती है

मगर इनदोनों की सोच कुछ अलग थी सिगरते के बारे मैं

आप सिगरते पिटे वक़्त जैसा सोचते है बिल्जुल वैसा ही हिता है

अपने पिछले गम को भुला के ये ऐसे बेफिक्र थे की मानो कुछ हुआ ही नहीं मगर ये शांति किसी तूफान का आने का सन्देश थी

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04/30/2016

केरला की कहानी V2.2 – तबाही तबाही

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 3:41 am

ठोकर लगना ,जिन्दगी कैसे जीना है ये सिखा देती है ,और सच्चे दोस्त कैसे मिलते है ये भी

हमारे पास बस एक -दुसरे का कंधा था और हाथ मैं सिगरेट दिलासा देने के लिए .ऐसा लग रहा था कि  हम फेल न हुए हो बल्कि हम दोनों की एक पारो किसी के साथ भाग गयी है ,जिसके बारे मैं हम न किसी को बता सकते है और न पूछ  सकते है .

खैर हादसे से उबरने के बाद जब हमने आस- पास नज़र दौड़ाई तो  पता चला कुछ और आशियाना उजड़ा था .

जिनके  नहीं उजड़े थे , वो चिकेन की पार्टिया उड़ा रहे थे ,इस तरह की एक -दो पार्टियों मैं भी शरीक हुए मगर उसी तरह जिस तरह से किसी हिट मूवी मैं कुछ सेकंड के लिए कोई आता है ,लोग सीटी बजाते है,और वो चला जाता है .

इस से पहले हम निराधार घूम रहे थे ,मगर अब हमारे पास मिशन था ,मिशन ये था की हम इस से भी बड़ी चिकेन  पार्टी देंगे जिसमें सिर्फ और सिर्फ चिकेन का लेग पिस होगा .

04/28/2016

केरला की कहानी V2.1 -Exam एक ऐसा तेज हवा का झोका है ,जो कभी –कभी आप के सारे कपडे ले उडता है

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 2:20 am

Exam एक ऐसा तेज हवा का झोका है ,जो कभी –कभी आप के सारे कपडे ले उडता है

Exam मैं पास या फेल सब उपर वाले के हाथ मैं है ,

क्या ,क्या बकवास कर रहे हो भाई ?

अरे सच्ची ,जब तक ठोकर खा के गिरते नहीं तब तक बड़े आदमी बनते है

दिल बहलाने के लिए ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है

अब मुझे नहीं सुननी तुम्हारी बकवास

यहाँ सारे लौंडे पार्टी कर रहे है और हम यहाँ पार्क मैं बैठ कर अपनी …..

शांत भाई शांत दुनिया खतम नहीं हुई है हमारी

मुझे और तुम्हे लगा के करीब बाईस बन्दे फेल है ,पेपर मैं

ओह्ह ऐसा क्या ?

हाँ सच्ची मैं बे

हाँ बे

मगर यार अब हमारा क्या होगा ?

हम अगली बार निकल लेंगे बे

पक्का न ,

चल चाय और सुट्टा लगाते है .

11/11/2015

इसी दुनिया मैं कही …

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 6:08 am

6:30 सुबह अलार्म  ने बज कर अपनी ड्यूटी पूरी कर दी अब आप पे है आप उठो न उठो उसकी बला से ,और वैसे भी कौन कमबख्त छुट्टी के दिन उठना चाहता है .

6:40 अबे ये फिर से कैसे बज उठा .

7:00 अरे ये धमाका कैसा ,कही सच मैं बिहार जीत की खुशी मैं पाकिस्तान वालो ने हमला तो नहीं कर दिया .

7:01 अब हमला हो ही गया है तो बाहर जा के क्या मरना यही सोते -सोते मरता हूँ

7:02 ओए तेरी की दीपावली है आज इसलिए तो .

7:10 ठीक है घर से बाहर क्या दीपावली और क्या होली चलो सोते है .

7:15 ये व्ह्ट्स  एप किसने बनाया है मिले थो सही ,कोई सोने भी नहीं दे रहा ऐसा करो मिठाई और पटाके भी इसी से भेज दो

8:00 कही ऐसा तो नहीं सारी दुनिया ख़तम हो गयी है और मैं अकेला बचा हूँ इस धरती पे नहीं -नहीं जक्लीन और कटरीना दोनों मैं से किसी एक को बचा लो भगवान इतना कह जोर-जोर से घंटी बजने लगी मंदिर की .

8:03 दस मिनट से मैं दरवाज़े पे खड़ा हो के घंटी बजा रहा हूँ ,सो रहे थे क्या ? माकन मालिक सामने खड़ा था और अपने चश्मे के पीछे दो पड़े दो सियार सी भूखी आँखों से घूर रहा था .आज दीपाली है और महीने का एडवांस किराया कहा है .

8:07 सच कहा है किसी ने जब भी कोई अच्छा काम करने  जाओ तो पूरी कायनात आप को सोने नहीं देगी  अभी मैं कुछ देर मैं दुनिया को बचाने वाला ही  था .

8:20 हाथ मैं काफी का मग लिए pause mode  मैं जाने के बाद ध्यान आया आज तो घर की सफाई कर के ही रहूँगा .

8:22 बहुत हो गयी सफाई थक गया मैं थोडा आराम  करता हूँ फिर काम करूँगा

11:30 काफी ज्यादा पीने का उल्टा असर हो गया है ,इसे पीने के बाद सबसे ज्यादा नींद आती है ,कुछ तो किया  जाय दीपावली है आज ,थोड़ी देर और सोता हूँ ,फिर उसके बाद सोचता हूँ .

09/25/2015

Bangalore F* city Part-2

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 5:59 pm
घर वालो का क्या है पैदा करते है, कुछ दिन पालते है और उसके बाद छोड़ देते है इस निर्मोही संसार मैं ,जहां कोई किसी का नहीं है
क्या -क्या कहा तुमने ?
यही की घर वाले  तो मेरा दुःख दूर करने से रहे ,अब तु ही मेरा बंधु -सखा है ,कुछ कर मेरा ?
साले एक तो ये प्रोजेक्ट का डेड -लाइन ,उसपर से कल टेस्टिंग वालो ने बग निकाला वो अलग  और  ये सिल्क -बोर्ड का ट्रैफिक और अब तू किस -किस को झेलु इस बाइस की उम्र मैं
मन करता है हिमालय चला जाऊ
गर्मी मैं जाना ,अभी नवंबर मैं ज्यादा सर्दी होती है वहाँ
तू और तेरे बकवास बातें इसलिए अंजली भागती है तेरे से
देख भाई कल रात तूने वादा किया था ,अब तुम कुछ सेटिंग करो वैसे भी वीकेंड आने मैं दो दिन बचे है
ओह्ह शिट  अब क्या हुआ ?
मेरे प्रोजेक्ट  डेड -लाइन और क्या साले जल्दी  चल ऑफिस
यार  तुम कैसे प्रोजेक्ट को लास्ट डे मैं ले जाते हो मुझे देख मेरे किसी प्रोजेक्ट के साथ ऐसा नहीं हुआ ?
अबे तू  कब-किस प्रोजेक्ट  लगा ?
हहा  प्रोजेक्ट अंजली और क्या
फिर से बकवास
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