Ratnakar Mishra

03/01/2013

केरला की कहानी पार्ट -11

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 1:58 am
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“मोहब्त एक एहसासों की पावन सी कहानी है ,कभी कबीरा दीवाना था …अभी मेरे रूम वाले दीवाने थे  …”बस अब तो चारो और यही सुने जा रहे थे …मुझे तो कभी-कभी ऐसा लग रहा था की ….ये मैं बाढ़ पीड़ित शिविर की तरह कही …प्यार पीड़ित शिविर मैं तो नहीं रह रहा हूँ …

लेकिन यदि आप मैं से कोई भविष्य मैं या ज्योत्सी मैं विश्वास रखता है तो ये जरूर जनता होगा की “वक्त से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को न मिला है और न मिलेगा “बस फिर भी मुर्ख लोग लगे रहते है …और इन मूर्खो मैं, मैं भी शामिल हो गया …हर –हर महादेव बोल के ….उस समय न सोचा की अब आगे क्या होगा ….लेकिन मेरी गाड़ी ज्यादा आगे नहीं चली …मेरी क्या किसी की भी नहीं चली …हा कुछ लोग जबरदस्ती धकेल रहे थे मगर मुझे पता था की …वो भी ज्यादा दूर आगे नहीं जा सकते है …..personal experince जो था ….

टूटे हुए दिल को बहलाने का एक मात्र साधन होता है नशा … क्योंकि जैसे  लोहा –लोहे को काटता वैसे ही इस प्यार के नशे को कोई नशा ही काट सकता था ….बस फिर क्या था .शुरू हो गए हम सभी भाई लोग …..मगर वो नशा ज्यादा दिन तक नहीं चला क्योंकि EXAM ने दरवाज़े पर दस्तक दे दी थी ….और फिर सारा नशा उड़ गया था …बस सामने कुछ दिख रहा था तो EXAM और EXAM

फिर धीरे –धीरे वक्त ने उस दर्द मैं भी मरहम लगाना शुरू कर दिया ..लेकिन ..घाव तो भर गए लेकिन दाग अभी भी है ….जो वक्त बे वक्त याद दिलाते है ….

कहते है की जिन्दी मैं जब तक कोई बड़ा तूफान न आये तब तक आदमी सम्हालना नहीं सीखता है …बस ऐसा ही कुछ बड़ा तूफान आया हमारा EXAM RESULT ले कर ….और उसने जो तबाही फैलाई वो बहुत ही खतरनाक था ….

 

 

 

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10/29/2010

सच का सामना

कितनो ने किया है अब तक सच का सामना
सच जो की कड़वा  हो सुनने मैं बुरा हो
सच का सामना इतना आसान नहीं
क्यों की जो दिखता है वो सच नहीं
सच तो चुप है जो किसी से बोलता नहीं
सच की चुप्पी ऐसी है की जैसे कुछ हो ही नहीं
सच  अनंत आकाश मैं फैला हुआ  है
बस दिल से उसे देखो और अपना लो

10/22/2010

क्यों तुम इतना याद आ रहे हो..

जब भी याद आता है तेरा चेहरा
हमारा दिल च्हुँक  उठता है
मगर अगले ही पल वो शांत सा हो  जाता है
मैं ने चाहा की तुम याद न आओ
मगर तेरे यादो ने ऐसा होने ना दिया
दिल  की बगिया अभी उजरी -उजरी सी है
तेरी हसी की यादो ने उस मैं फूल ही फूल खिला दिए
ये जमी बंज़र सी दिखती  है  तेरी यादो मैं
लेकिन तेरी आँखों की यादो ने इनमें भी सैलाब ला दिया
क्यों तुम इतना याद आ रहे हो ….

10/30/2009

मित्र

जैसे- जैसे हम हमारे जीवन का रास्ता  तय करते है
मिलेंगे लोग हर रोज़  हमे नये..
अधिकांश केवल संयोग से मिले हैं.
लेकिन, कुछ को हमारे रास्ते में भेजा जाता है.

इन दोस्तों  में क्या खास है
कौन सा  बंधन हैं हम नहीं बता सकते हैं;

उनके प्यार की कोई सीमा नहीं होती है.
उनकी उपस्थिति हम मैं जोश  बढ़ाता है
उनका साथ  दिल में गर्मी महसूस कराता है.

यह प्यार जब एक दालान पर हो जाता है,
तब भी मील की दूरी पर हो जाती है.
और हां, इन दोस्तों को, भगवान हमारे रास्ते में भेजता है,
रहने के लिए हमारे पास हमेशा ..

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