Ratnakar Mishra

11/27/2009

भूख

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 5:33 pm
Tags: , ,

आज घर मैं कुछ नहीं है खाने को, भूख अब सहा नहीं जा रहा है ,आज मैं कुछ खाने का जुगार कर के ही लौटूगा. ये सोच कर वो घर से निकला …. दुसरे शहर मैं जा कर वो काम करने लगा .दिन भर काम करने के बाद उसने कुछ रुपये जमा कर लिए .वापस अपने शहर के लिए वो चला मगर रास्ते मैं किसी ने उस के सारे रूपए लूट लिए … अब वो क्या ले कर अपने घर जायेगा वो ये सोचने लगा घर मैं पत्नी और बच्चे उस का इंतजार कर रहे होगे “अरे आज हम को भर पेट खाने को मिलेगा ” सुबह उस के बच्चे बोल रहे थे , पिछले कितने रातो से उस ने और उस कि पत्नी ने कुछ नहीं खाया था .ये सोचते-सोचते उस के आखो के सामने अधेरा छा गया . कुछ देर के बाद जब उस ने आखे खोली तो उस ने देखा कि उस के बच्चे खेल रहे है और उस कि पत्नी उस के सामने बैठी है और उस के जागने का इंतजार कर रही है .वो कुछ बोलने ही वाला था कि उस कि पत्नी ने उस को चुप रहने का इशारा किया और फिर उस के सामने ढेर सारे खाने का चीज रख दिया बिना कुछ पूछे वो खाने लगा और उस कि पत्नी उस को खाते देख रही थी .

“आज फिर भूख के कारण ४ लोगो कि जाने गई “और हमारी सरकार हाथ पर हाथ रख कर क्या कर रही है ये हम देखेगे इस ब्रेक के बाद …

Advertisements

Create a free website or blog at WordPress.com.