Ratnakar Mishra

03/28/2017

बच के रहना ,चेतन की नयी फिल्म आ रही है

Filed under: Review — ratnakarmishra @ 4:18 pm

बच के रहना ,चेतन की नयी फिल्म आ रही है ,कौन चेतन अब ये मत पूछ बैठना ,अरे वही जिसने हिंदी मीडियम के लौंडे के हाथ मैं अंगेजी नावेल थमा दिया ,और जिसे लौंडे बड़े स्टाइल से उसे हाथ मैं लेकर कॉलेज ,स्कूल ,ट्रेन और बसों मैं पाए जात्ते थे ,बड़ा कूल –कूल सा फीलिंग आता होगा उन्हें .

बात पुरानी नहीं तो नयी भी नहीं रही , बाद मैं बहुत से लोग आये –गए मगर चेतन से मुकाबला नहीं कर पाए चेतन ने जो नब्ज़ पकड़ी हिंदुस्तान की वो “five point someone” से लेकर “One Indian Girl” जो कोई नहीं पकड़ पाया .

वो एक “मॉस राइटर “है न की “क्लास  राइटर” अब जिस पे जनता मेहरबान तो क्या करेगा उसका जहान ,

मेरे या आपके जान-पहचान मैं ऐसे बहुत सारे लोग मिल जायेंगे,जो सिर्फ और सिर्फ चेतन को ही पढते है ,मगर आज कल कुछ लोग हमारे पोस्ट को भी पढ़ लेंगे

समय बदला चेतन ने किताब के साथ –साथ फिल्मो मैं भी अपना हाथ अजमाना शुरू किया ,अब आज दोपहर मैं उसने अपनी नयी फिल्म “हाफ गर्लफ्रेंड “का पोस्टर साझा  किया , जिसके बारे मैं उसने अपने फेसबुक पोस्ट पे दो दिन पहले से ही बता रखा था  ,सब प्यारे  लौंडे जाओ और ऑनलाइन किताब का आर्डर दो नहीं तो जो भी हाफ गर्लफ्रेंड है वो भी भाग जाएगी ,और हाँ पोस्टर देखना मत भूलना .

12/19/2016

देल्ही दरबार के का कहने

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 3:24 pm

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रविवार को भोरे -भोरे फ़ोन आया हमरे एक दोस्त का पूछा का कर रहे बे मिश्रा !

हम देल्ही दरबार लगा के बैठे है बे ,तू सुना

अबे साले अब कहने  और  सुंनाने के लिए का रहा है बे ,भोरे -भोर हमको अकेले छोड़ के निकल लिए देल्ही दरबार ,

ससुरा बड़का खौवाक हो बे सुबहे -सुबहे चिकेन तोड़ने पहुच गए  .

अबे गलतफहमी के चूरन हम किताब पढ़ रहे है,सत्य व्यास भैया का ” देल्ही दरबार”  न की चिकेन तोड़ रहे है  देल्ही -दरबार रेस्टोरेंट मैं .

ओह्ह जे बात ,पढ़ लोगो तो हमको भी देना जरा ,

जरा का बे ,संगीतया पे रोजे सौ -दू सौ उड़ता है  बे  ,अमेज़न से खरीद ले ,हमरे पास ऑटोग्राफ वाला है,हम न देंगे .

बस यही दोस्ती और प्यार बीच मैं आ गयी व्यास भैया की किताब ,सौरभ ने टोन मारा मेरे को

ठीक है ठीक ले लियो मगर पिछली बार की तरह  इसे भी गुम मत कर दियो .

कौन सा किताब हम तुम्हारा गम किये है बे ?

“बनारस टाकीज ”

वो उ तो हम गिफ्ट कर दिए थे ,सुरभि को

साला अभी बता रहा बे ,आ सामने ऐसा रगड़े गे न की ….

मेरी बात को बीच मैं ही काट के उसने कहा अबे उ हमसे सेट हो गयी थी , बनारस की थी न ,इस लिए दिए थे गिफ्ट मैं

ओह्ह ,रख फोन रख अब लियो मेरे से कोई किताब .

अरे बुरा मान गए बे ,कोई बात नहीं किताब मत दियो मेरे को मगर कहानी के बारे मैं बता दियो .

रख फोन रख फ़ोन बे

रख रहे है का भाव खा रहा है वैसे फ़ोन तो तू भी काट सकता है न बे

रख -रख ….

 

 

08/25/2016

अंरेज़ी दारू की कहानी !!

Filed under: Social issue — ratnakarmishra @ 4:30 pm

सोचो –सोचो वो कितना बड़ा नशेड़ी होगा जिसने पहली बार दारू का नशा चखा होगा ,अब पी पी के सर क्यों खुजला रहे हो  ,कि किसने बनाई होगी दारू पहली बार और सजाई होगी महफ़िल दोस्तों के साथ ? शायद होगा कोई  सच्चा आशिक जिसकी मसूका पड़ोस के लल्लन के साथ भाग गयी होगी ? वैसे मैंने सुना और पढ़ा है अरे न रे उसकी माशूका के बारे मैं नहीं ,दारू के बारे मैं कि  ,

बेबीलोन वाले आज से कुछ 4200 -4300 साल पहले शराब की देवी की पूजा करते थे जो की उस समय शहद और पानी से बनता था ,अब घर मैं बनाने मत लग जाना भाई लोग .

बियर के शौक़ीन तो इससे भी पुराने निकले  10000 से 12000 साल पहले से ही लोग इसका मज़ा ले रहे है ,कहते है की महशूर गिज़ा की पिरामीड बनाते समय हरेक मजदूर को बतौर राशन एक गैलन वाइन मिलती थी ,मज़े थे उनके भी उस समय लगभग हरेक मौको के लिए वाइन बनाई जाती थी ,जैसे खेल ,शादी ,पूजा किसी के मरने पर, दवाई के रूप मैं पुरे 17 तरह के बियर और 24 अलग –अलग स्वाद वाले वाइन मजे भरे दिन थे , वो भी क्या !

और जैसे ग्रीक वालो ने तो दारू को  प्रमोट  करने का ठेका ले लिया हो ,उनका मानना था की दारू पीने से लोग एक दुसरे के करीब आते है ,वो  सच हैं ,अभी भी ऐसा ही होता है .

रोम वालो ने सबकी सोच से दो कदम आगे निकल गए उन्होंने दारू को सिर्फ जरुरी ही नहीं बनाया बल्कि कुछ खेल भी उसके साथ जोड़ा जैसे ,पी –पी के उलटी करना ,खाली पेट पीना ,बॉटम्स उप करना ,ग्लास मैं पिने के बदले पाइप से पीना ,बड़े ही अजीबोगरीब एक्सपेरिमेंट कर मारा रोम वालो ने .

अब जहाँ हमारे देश के सवाल है हम पियक्कर कब बने हमें भी नहीं मालूम

हमारे यहाँ तो देवता लोग इसे सोमरस कह के ,पीते थे , “सोम” और “सूरा” के नाम से भी ये जाने जाते थे ,सोम सभ्य लोग आज के इलीट क्लास कह सकते है उनका ड्रिंक था और सूरा उस समय छत्रियो का क्योंकि ये सोम से ज्यादा स्ट्रोंग होता था ,हमारे यहाँ पे दारू की पहली निशानी वैदिक काल मैं मिली है करीब 3200 साल पुरानी ,फिर हमने इसे दवा के रूप मैं इस्तेमाल करना शुरू किया था ,फिर हमारे यहाँ मुग़ल आये और अपने साथ नए –नए फ्लेवौर लाये मुगलों ने बरसो तक हम पे राज किया उसके बाद अँगरेज़ आये और भैया तब से हमारे यहाँ अंग्रेजी दारू मिलनी शुरू हुई बस ख़तम हुई दारू की कहानी बे अब क्या पूरी बोतल खाली करने के बाद ही उठोगे क्या !

06/11/2016

मोबाइल दुकान वाले भैया एक मोबाइल दिखा दे

Filed under: कविता — ratnakarmishra @ 7:27 pm

one plus one आया ,one plus two आया और चला भी गया ,अब one plus three  का इंतजार हो रहा है ,इस तरह से मोबाइल के नाम रखे जाते रहेगे तों one plus one four hundred twenty भी हो जायेगा ,अब सैमसंग ने s1 ,s2 जैसे नाम रखे जो की ट्रेन की कोच के नाम से मेल खाते है ,एप्पल ने एप्पल से शुरुवात  की मगर अभी 6s और 6s plus पर अटकी है ,चाहे कुछ भी हो नाम के मामले मैं  micromax ने सब को पीछे छोड़ दिया ,LAVA or VIVO  दो नए ब्रांड ने तो ऐसे –ऐसे सपने दिखाए जो की एप्पल भी पूरा न कर सकी ,इस बीच अपनी मोटो ने भी बारिश मैं न भीगने वाली फ़ोन ला कर सबको चकित कर दिया वैसे यदि आप अभी कोई नया फ़ोन खरीदने का सोच रहे है तो निम्न बातो का ख्याल रखे तो अच्छा है वरना पैसा आपका आप जानो

नंबर एक – आपके मोबाइल मैं इतना बड़ा बेट्री होना चाहिए की आप उससे साथ दिन तक लगातार बात कर सके

नंबर दो –कैमरा चाहे जैसा भी हो मगर मेगा पिक्स्सल के मामले मैं 21 से कम नहीं होना चाहिए

नंबर तीन –सेल्फी लेने के लिए चहेरा अपने आप टेडा हो जाये ऐसा मोबाइल होना चाहिए

नंबर चार –इतना पतला हो की ,आप उससे अपनी सेव कर सको

नंबर पांच –मोबाइल मैं कम से कम पांच बकवास feature  होना चाहिए ,जैसे फिंगर सेंसर ,ऑटो answer जैसे फीचर जो कभी –कभी इस्तेमाल मैं आते है ,मगर showoff  के लिए जरुरु है

नंबर छ :- स्क्रीन का साइज़  macbook से छोटा और ipad से बड़ा होना चाहिए .

अब ऐसे फ़ोन को ऑनलाइन सर्च कीजिए और आर्डर कीजिए फिर like और comment  कीजिए गा

05/08/2016

केरला की कहानी V2.3

Filed under: कहानी — ratnakarmishra @ 1:55 pm

हम इंडियन इतनी जल्दी सुधर जाये तों क्या होगा जरा सोचो ,बार –बार गुप्ता जी के दरवाजे पे कचरा नहीं फेकेंगे ,ऑटो वाले से पांच रूपये के लिए नहीं लड़ेगे ,मिश्रा जी पान यहाँ –वहां नहीं थूकेंगे , दिवेदी घुस लेना छोड़ देगा ,केजरीवाल पलती मारना एक  मं एक मिनट हमारी कहानी मैं केजरीवाल आ ही नहीं सकता जी ,हमारी कहानी न उससे भी पुरानी है जितनी पुरानी अब इनकी दोस्ती हो गई है .

आज फिर कॉलेज मिस हो गया यार

हाँ ,सही बोल रहे हो चादर के निचे से ही सौरव ने कहा .

पक्का कल मिस नहीं करेंगे

हाँ बे ,वैसे ये पक्का इस हफ्ते का तीसरा है ,आज चौथा दिन है कल फ्राइडे फिर छुट्टी

तू सोचता बहुत है ,अभी सो जा

अच्छा ऐसा कर एक –एक सुट्टा लगाते है तब सोते है

हाँ ये आईडिया सही है बे

वैसे लोगो का कहना है की सिगरेट पीने से नींद भागती है

मगर इनदोनों की सोच कुछ अलग थी सिगरते के बारे मैं

आप सिगरते पिटे वक़्त जैसा सोचते है बिल्जुल वैसा ही हिता है

अपने पिछले गम को भुला के ये ऐसे बेफिक्र थे की मानो कुछ हुआ ही नहीं मगर ये शांति किसी तूफान का आने का सन्देश थी

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